शुक्रवार, 21 अक्तूबर 2011

अय्याश तानाशाह की दास्तान














गद्दाफी और उसके बेटे महिला बॉडीगार्ड से करते थे रेप

त्रिपोली. लीबिया के कर्नल मुअम्मर गद्दाफी के खात्मे के साथ ही तानाशाही के एक युग का अंत हो गया है। इस सैन्य तानाशाह की अय्याशी के चर्चे समय-समय पर सुर्खियां बनीं। कुछ दिनों पहले गद्दाफी की महिला बॉडीगार्ड ने आरोप लगाया कि कर्नल और उसके बेटों ने उनके साथ रेप किया और भला-बुरा तक कह दिया।
'द संडे टाइम्स ऑफ माल्टाÓ की रिपोर्ट के मुताबिक गद्दाफी बॉडीगार्ड रह चुकीं महिलाओं का यह भी आरोप है कि तानाशाह और उसके बेटों ने उनके साथ रेप करने के बाद उन्हें भला-बुरा कहते हुए छोड़ दिया कि वो उनसे 'ऊबÓ गए हैं। अखबार लिखता है कि पहले गद्दाफी इन महिलाओं के साथ रेप करता था फिर से किसी 'वस्तुÓ की तरह दूसरों को सौंप देता था। गद्दाफी के बाद उसके बेटों में से एक इनके साथ रेप करता था, इसके बाद इन्हें छोडऩे से पहले सेना के आला अधिकारियों को सौंपा जाता था।
करीब चार दशकों तक लीबिया में हकूमत चलाने वाला गद्दाफी महिला बॉडीगार्ड रखने का शौकीन था जो कुंवारी होती थीं और हर वक्त उसके साथ साये की तरह होती थी। 30 महिला बॉडीगार्ड के बेड़े को 'अमेजोनियनÓ का नाम दिया गया था। इस बॉडीगार्ड में से पांच महिलाओं ने यह खुलासा कर सनसनी मचा दी थी कि गद्दाफी और उसके बेटे उनके साथ रेप करते थे।
इन बॉडीगार्ड के दावों की जांच कर रही मशहूर लीबियाई मनोवैज्ञानिक डॉ. सेहम सरगेवा ने कहा कि गद्दाफी की सत्ता के वफादार सैनिकों ने रेप को जंग के हथियार के तौर पर इस्तेमाल किया और हमलों के लिए वियाग्रा और कंडोम को बढ़ावा दिया।
गद्दाफी की एक पूर्व महिला बॉडीगार्ड ने बताया कि उसे तानाशाह की सुरक्षा में ज्वाइन करने पर मजबूर किया गया। गद्दाफी के सैनिकों ने इस महिला से कहा कि उसका भाई लीबिया से माल्टा को ड्रग्स तस्करी करते हुए पकड़ा गया है। ऐसे में उसके पास दो विकल्प हैं कि या तो वो तानाशाह की सुरक्षा यूनिट में शामिल हो जाए नहीं तो उसका भाई जिंदगी भर जेल की सलाखों में सड़ता रहेगा।
यह मनोवैज्ञानिक गद्दाफी के खिलाफ सबूत जुटा रही हैं जो अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायालय को सौंपा जाना है। इन्होंने सिविल वॉर शुरू होने से लीबिया में कम से कम 300 रेप के मामलों से जुड़े दस्तावेज तैयार किए हैं। हालांकि उनका कहना है कि लीबिया में कुल 6000 महिलाओं के साथ बलात्कार किया गया है।
बीते जून में न्यायालय के प्रोसेक्यूटर लुई मोरेनो ओकाम्पो ने कहा कि इस बात के सबूत हैं कि गद्दाफी ने अपने सैनिकों को उन महिलाओं का बलात्कार करने के आदेश दिए जिन्होंने तानाशाही के खिलाफ आवाज उठाने की हिम्मत की। कर्नल मुअम्मर गद्दाफी के खात्मे के साथ ही लीबिया में 42 साल लंबे तानाशाही शासन के अंत के साथ ही शनिवार को लीबिया को आज़ाद मुल्क घोषित कर दिया जाएगा। लीबिया की अंतरिम सरकार चला रही नेशनल ट्रांजिशनल काउंसिल (राष्ट्रीय अंतरिम परिषद) लीबिया को आज़ाद मुल्क घोषित करेगी। इसके साथ ही लीबिया में पूरी तरह से लोकतांत्रिक सरकार बनने की उलटी गिनती भी शुरू हो गई है। लेकिन गद्दाफी की मौत कैसे हुई, इस पर अब भी रहस्य बरकरार है।
लीबिया के अंतरिम प्रधानमंत्री और एनटीसी में नंबर दो की हैसियत रखने वाले महमूद जिबरिल ने गद्दाफी की मौत के बाद ऐलान किया, अब लीबिया के लिए नई शुरुआत का समय आ गया है। नया और एकता के सूत्र में बंधा लीबिया। गद्दाफी की मौत के बाद लीबिया में जश्न का माहौल है। दुनिया के अलग-अलग इलाकों में रह रहे लीबियाई नागरिक भी तानाशाही शासन के अंत पर खुशी मना रहे हैं। लेकिन दुनिया के कई देश लीबिया के भविष्य को लेकर मिलीजुली प्रतिक्रियाएं जाहिर कर रहे हैं। दुनिया के कई मुल्क लीबिया को शुभकामनाएं देने के साथ आशंका भी जाहिर कर रहे हैं कि इस देश में अराजकता का माहौल जल्द खत्म हो पाएगा।
मिसराता की मस्जिद में रखे गए गद्दाफी के शव को सिरते से मिसराता एक जुलूस की शक्ल में ले जाया गया, लेकिन शुक्रवार को गद्दाफी को गुपचुप ढंग से दफनाया जाएगा। कुछ जानकार इसकी वजह यह बता रहे हैं कि अगर गद्दाफी के शव को सार्वजनिक तौर पर दफन किया जाएगा तो उसकी मजार पर लोग इक_ा होंगे और उसे शहीद का दर्जा देंगे। इस साल मई में ओसामा बिन लादेन को भी अमेरिका ने मारने के बाद समुद्र में दफन कर दिया था।
खबरों के मुताबिक अपने आखिरी समय में अपने गृह नगर सिरते में छुपा गद्दाफी वहां से भागने की फिराक में था। वह अपने काफिले के साथ वहां से जैसे ही निकला, फ्रेंच लडा़कू विमानों ने उस पर हमला कर दिया। हवाई हमले के बाद गद्दाफी का काफिला नेशनल ट्रांजिशनल काउंसिल की फौज के साथ झड़प में फंस गया। माना जा रहा है कि इस दौरान हुई गोलीबारी में गद्दाफी जख़़्मी हो गया। इसके बाद वह जमीन पर घिसटते हुए एक पाइप के पास जाकर छुप गया। कुछ घंटों बाद एनटीसी के लड़ाकों ने गद्दाफी को पानी की निकासी के लिए बने एक पाइप के पास से खोज निकाला। बताया जा रहा है कि इनमें से एक ने अपने जूते से गद्दाफी की पिटाई की। चश्मदीदों के मुताबिक गद्दाफी दया की भीख मांग रहा था। वहीं, गद्दाफी के शव के साथ एंबुलेंस में सवार अब्दल-जलील अब्दल अजीज नाम के डॉक्टर का दावा है कि गद्दाफी को दो गोलियां लगी थीं। अजीज के मुताबिक एक गोली गद्दाफी सिर में और सीने पर लगी थी। हालांकि, अभी तक पूरी तरह से यह साफ नहीं हो पाया है कि गद्दाफी का अंत कैसे हुआ। नाटो ने भी एक बयान में कहा कि उसके जंगी विमानों ने सिरते के नजदीक सेना की दो गाडिय़ों पर बमबारी की थी। लेकिन नाटो इस बात पुष्टि नहीं कर पाया कि इन गाडिय़ों में गद्दाफी था या नहीं।
इस बीच, गद्दाफी की मौत कैसे हुई, इस रहस्य से लीबिया में अधिकारी पर्दा उठाने की कोशिश कर रहे हैं। लीबियाई अधिकारियों का कहना है कि पूर्व शासक कर्नल मुअम्मर गद्दाफ़ी सिरते में उनके वफ़ादारों और अंतरिम सरकार के सैनिकों के बीच हुई गोलीबारी में मारे गए। लीबिया के कार्यवाहक प्रधानमंत्री और एनटीसी में नंबर दो की हैसियत रखने वाले महमूद जिबरिल ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में गद्दाफी की मौत की पुष्टि करते हुए कहा है कि अंतरिम सरकार के सैनिकों और गद्दाफ़ी के वफ़ादारों के बीच गोलीबारी हुई जिसमें गद्दाफी के सिर में गोली लगी। उन्होंने इस बात की पुष्टि की कि कर्नल गद्दाफ़ी को जि़ंदा पकड़ा गया था, मगर अस्पताल पहुंचने से पहले उनकी मौत हो गई।
जिबरिल ने मीडिया को जानकारी दी कि फ़ोरेंसिक जांच में इस बात की पुष्टि हो गई है कि कर्नल गद्दाफ़ी की पकड़े जाने के बाद ले जाए जाते समय गोलियों की चोट से मौत हो गई। जिब्रील ने रिपोर्टों के हवाले से कहा, जब कार जा रही थी तो क्रांतिकारियों और गद्दाफ़ी के सैनिकों के बीच गोलीबारी हुई जिसमें एक गोली उनके सिर में लगी। हालांकि, जिबरिल के अनुसार डॉक्टर ये नहीं बता सके कि गोली क्रांतिकारियों की ओर से लगी या गद्दाफ़ी के किसी सैनिक की गोली ने ही उनकी जान ली। इससे पहले एनटीसी के कुछ सैनिकों ने कर्नल की मौत का अलग कि़स्सा बयान किया था, जहां उनका कहना था कि जब वह भागने की कोशिश कर रहे थे तो उन्हें पकडऩे वालों ने ही उन्हें गोली मार दी।

दूसरी तरफ, लीबिया में लंबे समय से बमबारी कर रहे नाटो के संचालक अगले कुछ घंटों में बैठक करके लीबिया में बम हमले को खत्म करने की घोषणा कर सकते हैं। नाटो महासचिवन ऐंडर्स फ़ॉग रैसमूसन ने कहा कि कर्नल गद्दाफ़ी की मौत के साथ अब वह मौक़ा आ गया है। उन्होंने कहा, कर्नल गद्दाफ़ी का 42 साल का खौफ का राज आखऱिकार खत्म हो गया है। मैं सभी लीबियाई लोगों से अपील करता हूं कि वे आपसी मतभेद भुलाकर एक उज्ज्वल भविष्य के लिए मिलकर काम करें।
इस बीच, खबरें हैं कि गद्दाफी के एक बेटे सैफ अल-इस्लाम बानी वालिद नाम के शहर में देखा गया था। इसके बाद वह बानी वालिद के आसपास के रेगिस्तान में भाग गया है। वहीं, गद्दाफी के दूसरे बेटे मुत्तसिम गद्दाफी की मौत हो गई है।

दुनिया भर में खुशी की लहर
गद्दाफी की मौत से लीबिया सहित दुनिया के कई अन्य देशों में खुशी की लहर दौड़ गई है। दुनिया के कई देशों ने गद्दाफी की मौत का स्वागत किया है। अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने लीबियाई तानाशाह की मौत को मध्य-पूर्व के तमाम कठोर शासकों के लिए सबक बताया। उन्होंने कहा कि ऐसे शासकों का ऐसा अंत एक तरह से निश्चित है। वहीं, हिलेरी क्लिंटन ने गद्दाफी की मौत को लीबिया के इतिहास में एक काले अध्याय की समाप्ति बताया है।

फ्रांस के राष्ट्रपति निकोलस सरकोजी ने गद्दाफी की मौत को लीबिया के इतिहास में मील का पत्थर बताते हुए कहा है कि चार दशकों से ज़्यादा लंबे चले तानाशाही शासन के खिलाफ जंग में जनता की जीत हुई है। लेकिन सरकोजी ने इस बात की आशंका जताई है कि कहीं सद्दाम हुसैन की मौत के बाद इराक जैसे माहौल लीबिया में न पैदा हो जाएं। उन्होंने कहा, सिरते की आज़ादी, एक नई प्रक्रिया की शुरुआत है, जिसमें लोकतांत्रिक प्रणाली की स्थापना होगी। डेविड कैमरन ने भी इसी तरह के भाव जाहिर किए हैं। मिस्र और अरब लीग ने भी लीबिया को नई शुरुआत के लिए शुभकामनाएं दी हैं। लीबिया की अंतरिम एनटीसी की सरकार के साथ कड़वे रिश्ते के बावजूद चीन ने लीबिया में लोकतंत्र और एकता पर जोर दिए जाने की अपील की है।लीबिया में तानाशाह मुअम्मर गद्दाफी के मारे जाने से जश्न का माहौल है। अपनी अय्याशी के लिए मशहूर गद्दाफी त्रिपोली में आलीशान महल में रहता था। विद्रोहियों की ओर से सत्ता पर कब्जे की लड़ाई के बाद गद्दाफी ने यह महल छोड़ दिया और भागता फिरता रहा। खबर है कि जिस वक्त लड़ाकों ने उसे पकड़ा, वह सिरते में एक नाले में छिपा था।

कर्नल मुअम्मर गद्दाफी के खात्मे के साथ ही लीबिया में 42 साल के लंबे तानाशाही शासन का अंत हो गया। लेकिन जिस तरह से लोगों को गद्दाफी की ज़्यादतियां याद रहेंगी, उसी तरह से लोग किसान परिवार से निकलकर सेना में दाखिल हुए और फिर लीबिया की सत्ता पर काबिज होने वाले इस तानाशाह की जि़ंदगी की खास स्टाइल को भी याद करेंगे। गद्दाफी की मौत चाहे जैसी भी हो, लेकिन उसकी जि़दंगी किसी परिकथा से कम नहीं थी। कहीं भी दौरे पर जाता तो होटल के बजाय शिविर बनाकर रुकता था। किसी पुरुष के बजाय सुरक्षा के लिए महिला सैनिकों को ही रखता था। उसके पास ऐसे कई भरोसेमंद सैनिक थे जो उसके लिए जान भी दे सकते थे।
गद्दाफी के ऐश-ओ-आराम का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वह अपनी सुरक्षा के लिए 30 कुंवारियों को रखता था। ये महिला सुरक्षा कर्मी गद्दाफी के साथ साए की तरह रहती थीं। नीले रंग की वर्दी पहनने वाली महिला सुरक्षाकर्मी किसी को भी पलक झपकते ही ढेर कर सकती थीं। अपनी विदेश यात्राओं के दौरान गद्दाफी 400 लोगों का दल लेकर जाता था। इन यात्राओं में गद्दाफी अपने साथ पांच विमान, एक ऊंट और खास टेंट रखता था।
लीबिया दुनिया के उन दस देशों में है जहा कचा तेल सबसे यादा होता है। कहा जाता है कि लीबिया की जमीन के नीचे पानी कम तेल यादा है। गद्दाफी के मारे जाने के बाद लीबिया में अराजकता फैल सकती है। ऐसे में तेल उत्पादन और सप्लाई प्रभावित होने की आशंका है। 12 बड़ी कंपनियां यहां तेल निकालने का काम करती हैं। अराजकता से इनका काम प्रभावित होगा। 40 प्रतिशत कचे तेल की सप्लाई एशिया में लीबिया से ही। 90 यूरोपीय देशों को लीबिया तेल देता है। दुनिया में प्रति दिन 8.5 करोड़ बैरल कचे तेल का उत्पादन होता है। इनमें से 16लाख बैरल तेल लीबिया के भंडारों से ही निकलता है। अफ्रीकी देशों से निकलने वाले तेल का करीब 45 फीसदी लीबिया से निकलता है। तेल भंडारों पर कब्जा जमाए अरब और अफ्रीकी देशों के तानाशाह पश्चिमी देशों के निशाने पर हैं।
गद्दाफी की मौत के बाद भारत ने लीबिया को नए सिरे से बसाने में हर मुमकिन मदद देने का वादा किया है। भारत वहां के विद्रोहियों को काफी पहले मान्यता दे चुका है। गद्दाफी का नजरिया भारत के पक्ष में नहीं रहा था। उसने तो कश्मीर को इराक की तरह अलग देश बनाने का सुझाव दिया था। साल 2009 में संयुक्त राष्ट्र की जनरल एसेम्बली में अपने एक मात्र भाषण में गद्दाफी ने कहा था कि कश्मीर को भारत और पाकिस्तान से अलग कर एक स्वतंत्र राय घोषित कर देना चाहिए। और कश्मीर को इराक की तर्ज पर बाथिस्ट राय बना देना चाहिए। गद्दाफी को लेकर भारत कभी सहज नहीं रहा। अब उम्मीद है कि नया निजाम भारत की महत्ता को समझ कर संबंध मजबूत करने पर जोर दे।

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