शनिवार, 31 मई 2014

अब कवरेज क्षेत्र के बाहर नहीं रहेेंगे पुलिस जवान

पीएचक्यू ने जारी किया सिम,आज से आला अधिकारियों के नंबर बदलेंगे
भोपाल। प्रदेश पुलिस के अधिकारी और जवान अब कवरेज क्षेत्र के बाहर नहीं रहेंगे,क्योंकि पीएचक्यू ने इनके लिए शनिवार को आइडिया की सिम जारी किया है। ये सिम जिलों में पुलिस की संख्या के अनुपात से वितरित किए गए हैं। साथ ही उन अधिकारियों के लिए भी 50 हजार सिम जारी किया है जिनके पास पहले से बीएसएनएन के सिम हैं। दरअसल,बीएसएनएल के पुअर नेटवर्क के कारण जब सरकार को यह कदम उठाना पड़ा है। उल्लेखनीय है कि अब तक इंवेस्टिगेशन अफसरों और आला अधिकारियों को ही सरकार की तरफ से सिम दी जाती थीं। अब हर थाने के स्टाफ को सिम देने का प्रयास किया जा रहा है। अब तक खुद के खर्च पर मोबाइल फोन चलाने वाले सिपाहियों के लिए यह राहत भरी खबर है। सरकार की तरफ से बांटी गई सिम में कई प्लान भी रहेंगे, जिसके जरिए कर्मचारी अपनी बात एक-दूसरे तक पहुंचा सकेंगे। इससे आला अफसरों से लेकर अधीनस्थ लगातार संपर्क में रहेंगे। इसका अच्छा प्रभाव भी देखने को मिलेगा। बीएसएनएल के बजाय अब आइडिया की सिम सरकार ने पुलिस अफसरों और जवानों के लिए बीएसएनएल के बजाय अब आइडिया की सिम जारी किया है। इस कारण जिन आला अधिकारियों के पास बीएसएनएल का नंबर है वह रविवार से बदल जाएगा। हालांकि निरीक्षक से लेकर निचले स्तर के पुलिस कर्मचारियों के मोबाइल नंबर में कोई परिवर्तन नहीं होगा। क्योंकि आम आदमी से जुड़े होने के कारण निरीक्षक से लेकर थाने में मौजूद एचसीएम के नंबरों की पोर्टेबिलिटी कराई जा रही है। वहीं पुलिस अफसरों के नए नंबर जल्द ही वेबसाइट पर डालने की तैयारी की जा रही है। इनका कहना है बीएसएनएल कंपनी के नेटवर्क की गड़बड़ी को देखते हुए कंपनी से नाता तोड़ लिया गया है। एक जून से आइडिया की सेवाएं शुरू की जा रही हैं। पिछली सिम जो बीएसएनएल की थीं, उनकी पॉर्टबिलिटी चेंज कर आइडिया में कंवर्ट किया जा रहा है। सभी एक ही सीयूजी (क्लोज्ड यूजर ग्रुप) में जुड़ जाएंगे। शशिकांत शुक्ला, एसपी मुख्यालय, भोपाल ये रहेंगे फायदे - इस सिम का उपयोग करने वाला व्यक्ति कभी मोबाइल बंद नहीं रख सकता। - इस सिम में 300 मैसेज, 12000 सेकंड आइडिया-टू-आइडिया और 33000 सेकंड अदर मोबाइल कॉलिंग फ्री रहेगी। - हर किसी के पास सरकारी नंबर रहेगा। इससे यह तय रहेगा कि उस जिम्मेदारी को निर्वाह करने वाला व्यक्ति बदल सकता है, लेकिन नंबर नहीं। - हर पुलिसकर्मी को सुविधा मिलेगी और वह भी सरकारी खर्च पर। - 200 एमबी इंटरनेट डाटा भी मिलेगा, जिससे वे फोटो या वीडियो बनाकर ग्रुप पर डाल सकते हैं। - अपने जिले के वॉट्स-ऐप ग्रुप पर एक साथ जुड़ सकेंगे। ये रहते हैं नुकसान - इसमें हर किसी कर्मचारी या टीआई का रिकॉर्ड चेक किया जा सकता है। उसकी रिकॉंिर्डंग भी कराई जा सकती है। इससे निजी बातें भी सामने आ सकती हैं। - नाइट गश्त करने वाले पुलिसकर्मी को भी सरकारी सिम पर आया फोन उठाना पड़ेगा। - एक लिमिट तक इसमें फोन कॉलिंग और मैसेज फ्री है, लेकिन उसके बाद चार्ज लगेगा। - पहले से दो-दो मोबाइल धारक पुलिसकर्मियों को अब तीसरा मोबाइल भी रखना पड़ेगा। - मोबाइल पर झूठ बोलने वाले व्यक्ति की लोकेशन भी ट्रेस हो सकती है। यदि वह अपनी लोकेशन गलत बता रहा है तो।

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